Month: June 2019

गर्मी आई! गर्मी आई!!पानी से दोस्ती कराई।। जिस पानी को छूने से,सर्दी में हम डरते हैं।उस पानी की खातिर,आपस में लड़ मरते हैं।। पानी में ही जिंदगानी है,अब जैसे ही दिखती है।पानी ही है महारानी भी,अब ऐसे ही ये लगती…

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मम्मी! तुमने हमको जतन से पाला,गर्मी बरसात जाड़ा में पड़ता पाला।ठिठुर ठिठुर कर गीले वस्त्रों में सोयी,रात जग जग आंखों की निंदियाखोयी।। मेरी कहां ! कहां! कहां की किलकारी सेअक्सर बापू जग जाते! मुझे गले लगातेगोदी में उठाकर रात रात…

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तावे सी तपतीजेठ की दुपहरी मेंघर के लान मेंबिखेरे गए दानों कोखाने आते रोज रोजछोटी-छोटी चिड़ियांकई सारे कबूतर!कुछ एकाध कौवे!! चिलचिलाती दोपहरीखिड़की से झांक करमुंह को अच्छी तरह सेकपड़ों से ढांक करदेखता हूं बाहर—धूप से पटे मैदान को!! जहां न…

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ओ माई मोर! हम हूं इसकुलवा जाबै ना! ओ काका मोरे ! हम हूं इसकुलवा जाबै ना। ओ चाचा मोरे! हम हूं इसकुलवा जाबै ना, ओ ताऊ मोरे! हम हूं इसकुलवा जाबै ना।। “ऐ बेटी! जब तू जईबू ,पढ़ै इसकुलवा…

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