भूख!!!!!! – Shailendra Kumar Mishra

तावे सी तपतीजेठ की दुपहरी मेंघर के लान मेंबिखेरे गए दानों कोखाने आते रोज रोजछोटी-छोटी चिड़ियांकई सारे कबूतर!कुछ एकाध कौवे!! चिलचिलाती दोपहरीखिड़की से झांक करमुंह को अच्छी तरह सेकपड़ों से ढांक करदेखता हूं बाहर---धूप से पटे मैदान को!! Eat food, no poorness जहां न कोई पेड़ना थी कोई वहां छांव!'…