महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र (अयि गिरिनन्दिनि) – Mahisasurmardini Stotram (Aigiri Nandini) in Hindi

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र इन हिंदी अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि.. ॥ सुरवर वर्षिणि दुर्धर धर्षिणि दुर्मुख मर्षिणि हर्षरतेत्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिष मोषिणि घोषरते।दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि… ॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रिय वासिनि हासरतेशिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय शृङ्गनिजालय मध्यगते।मधुमधुरे मधुकैटभ…

गर्मी आई!!!!

गर्मी आई! गर्मी आई!!पानी से दोस्ती कराई।। जिस पानी को छूने से,सर्दी में हम डरते हैं।उस पानी की खातिर,आपस में लड़ मरते हैं।। पानी में ही जिंदगानी है,अब जैसे ही दिखती है।पानी ही है महारानी भी,अब ऐसे ही ये लगती है।। गर्मी आई - birds in warm weather without water…

ट्विंकल की फरियाद

मम्मी! तुमने हमको जतन से पाला,गर्मी बरसात जाड़ा में पड़ता पाला।ठिठुर ठिठुर कर गीले वस्त्रों में सोयी,रात जग जग आंखों की निंदियाखोयी।। मेरी कहां ! कहां! कहां की किलकारी सेअक्सर बापू जग जाते! मुझे गले लगातेगोदी में उठाकर रात रात थे वह बहलातेभैया! भी मुझको उंगली पकड़ के घुमाते।। ताऊ!…

भूख!!!!!! – Shailendra Kumar Mishra

तावे सी तपतीजेठ की दुपहरी मेंघर के लान मेंबिखेरे गए दानों कोखाने आते रोज रोजछोटी-छोटी चिड़ियांकई सारे कबूतर!कुछ एकाध कौवे!! चिलचिलाती दोपहरीखिड़की से झांक करमुंह को अच्छी तरह सेकपड़ों से ढांक करदेखता हूं बाहर---धूप से पटे मैदान को!! Eat food, no poorness जहां न कोई पेड़ना थी कोई वहां छांव!'…