Category: Social

तावे सी तपतीजेठ की दुपहरी मेंघर के लान मेंबिखेरे गए दानों कोखाने आते रोज रोजछोटी-छोटी चिड़ियांकई सारे कबूतर!कुछ एकाध कौवे!! चिलचिलाती दोपहरीखिड़की से झांक करमुंह को अच्छी तरह सेकपड़ों से ढांक करदेखता हूं बाहर—धूप से पटे मैदान को!! जहां न…

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ओ माई मोर! हम हूं इसकुलवा जाबै ना! ओ काका मोरे ! हम हूं इसकुलवा जाबै ना। ओ चाचा मोरे! हम हूं इसकुलवा जाबै ना, ओ ताऊ मोरे! हम हूं इसकुलवा जाबै ना।। “ऐ बेटी! जब तू जईबू ,पढ़ै इसकुलवा…

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